साइबर हमले से बचाव करने में एंटी वायरस और एंटी मेलवेयर में से कौन दे पायेगा आपके डिवाइस को सुरक्षा , पूरा जानें


तो आज हम बात कर रहे हैं एंटीवायरस और एंटी मैलवेयर के बारे में , सुनने ये भले ही एक जैसे लगें लेकिन इनमे काफी अंतर हैं ये एक दुसरे से बिलकुल डिफरेंट हैं  

लेकिन इनके बारे में बात करने से पहले मैं बात करूँगा  वायरस v/s मैलवेयर के बारे में

और हाँ अगर आप साइबर सिक्यूरिटी में इंटरेस्ट रखते हैं तो साइबर सिक्यूरिटी से जुडी नयी नयी जानकारी के लिए mycslab की वेबसाइट और youtube को सब्सक्राइब और फॉलो करना न भूलें mycslab आपको इन्स्ताग्राम ऑफ़ फेसबुक पर भी आसानी से मिल जाएगा |

जब लोग पहली बार साइबर सिक्यूरिटी के बारे में जानना शुरू करते हैं तो यहाँ पर एक सवाल आज नहीं तो कल सबके दीमाग में आता ही है की आखिर एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर है क्या , क्या ये कोई सॉफ़्टवेयर है या कोई जारगन ect ect।

तो आइये सबसे पहले बात करते हैं एक वायरस की

वायरस एक तरह कोड या कहें की सेल्फ रेप्लिकेटिंग प्रोग्राम है जो  आपके कंप्यूटर में खुद का क्लोन बनाता रहता है और कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। 

जबकि मैलवेयर एक बहुत बड़ा केटेगरी है जिसमें वर्म्स, एडवेयर, स्पाईवेयर, रैंसमवेयर, ट्रोजन और वायरस जैसे कई नुक्सान पहुंचाने वाले सॉफ़्टवेयर शामिल हैं। 

इसलिए आप बोल सकते हैं की  “सभी वायरस मैलवेयर होते हैं लेकिन सभी मैलवेयर वायरस हों ये जरूरी नहीं “

 

अब जब हम जान चुके हैं की कंप्यूटर वायरस और मैलवेयर क्या हम बात करेंगे  एंटीवायरस और एंटी मैलवेयर के बारे में 

एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर आपके डिवाइस में वायरस है या नहीं ये  स्कैन करता है और इनसे होने वाले नुकसान पता करता है। और ऐसा करने के लिए एक सिस्टम पर सभी प्रोग्राम्स की मोनिटरिंग करते रहते हैं और अगर कोई भी प्रोग्राम सस्पेक्टेड लगता है जिनसे कंप्यूटर को नुक्सान पहुँच सकता हैं तो ये उस प्रोग्राम की सूचना दे देते हैं। कोई भी एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का मकसद सभी वायरस  को जल्द से जल्द ब्लॉक करना और निकालना होता है।

आजकल साइबर क्राइम बढ़ गए हैं इनसे होने वाले खतरों से बचने के लिए , एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर इनस्टॉल करना काफी इम्पोर्टेन्ट हैं। इसलिए अगर आपके पास एंटीवायरस सिक्यूरिटी नहीं है, तो आपके डिवाइस को भी वायरस का खतरा हो सकता हैं जो आपके कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस को खराब कर सकते हैं “

एक अच्छा एंटीवायरस चुनने के लिए मैं आपको बताता हूँ की आपको क्या क्या देखना हैं 

रीयल-टाइम स्कैनिंग : एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर आपके सिस्टम को लगातार स्कैन करता रहना चाहिए और जैसे ही कोई खतरा लगे तो user को तो बताना ही है साथ में उस वायरस को किस तरह रिमूव या ब्लाक करना है ये डिसिशन लेकर तुरंत एक्शन लेना चाहिए |

  • आटोमेटिक  अपडेट :आजकल साइबर क्राइम इतना बढ़ गया है की नित नए नए वायरस बनते रहते हैं | एक अच्छा एंटीवायरस वो ही है जो जितना जल्दी हो सके नए नए वायरस के बारे में अपडेटेड रहे और जैसे ही कोई मिलता जुलता वायरस सिस्टम  में दिखे तो तुरंत उसकी पहचान कर ले| नए नए वायरस की डेफिनेसन इन्टरनेट से कनेक्ट होने के बाद आटोमेटिक अपडेट हो जानी चाहिए |

 वायरस को ब्लाक या रिमूव करने वाला होना चाहिए : एक अच्छा एंटीवायरस वो ही है जो आपके system से वायरस को दूंढ कर ना केवल एक अलर्ट मेसेज दे बल्कि वायरस को परमानेंटली system से हटा भी दे|वायरस की होते कंप्यूटर में एक ही वायरस बार बार नहीं आना चाहिए 

और अब देख लेते हैं की एंटी-मैलवेयर का क्या मतलब है?

एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर एंटीवायरस के मुकाबले ज्यादा अग्रेस्सिव और ज्यादा पावरफुल होते हैं। मैलवेयर, वायरस की तरह आसानी से पहचान में नहीं आता इसको पावरफुल अल्गोरिथम वाले एंटीवायरस सॉफ्टवेर की मदद से ही पहचाना जा सकता हैं एक अचा एंटी मैलवेयर यूजर्स को नए नए और एक से बढ़कर एक खतरनाक मैलवेयर से बचाता है ।  सभी एंटी मैलवेयर में एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर की तुलना में मैलवेयर को पकड़ने के लिए अपने रूल्स को तेज़ी से बदलने की क्षमता होती  है, जिसका मतलब है कि जब आप कंप्यूटर या मोबाइल में वेब ब्राउज़र के जरिये इन्टरनेट सर्फ  करते समय आपके सामने आने वाले नए मैलवेयर से बचने के लिए येअच्छे तरीक से सिक्यूरिटी दे पाता हैं।

मैलवेयर का पता लगाने के लिए एंटी-मैलवेयर तीन अलग-अलग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है

सिग्नेचर-बेस्ड डिटेक्शन

कंप्यूटर या मोबाइल प्रोग्राम्स का एक यूनिक डिजिटल सिग्नेचर होता है जिससे कंप्यूटर अलग अलग सॉफ्टवेर की पहचान करता हैं| एंटीमैलवेयर सॉफ्टवेर भी इसी डिजिटल सिग्नेचर की मदद से नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ़्टवेयर की पहचान कर लेते हैं।

प्रोग्राम के काम करने के तरीके को देखकर

एंटी मैलवेयर सॉफ्टवेर कंप्यूटर में जितने भी प्रोग्राम हैं उनको लगातार मॉनिटर करता रहता हैं तो जैसे ही कोई प्रोग्राम कोई सस्पेक्टेड एक्टिविटी करता हैं एंटी मैलवेयर उस प्रोग्राम को पहचान कर उसको ब्लाक या रिमूव कर देता हैं |

सैंडबॉक्सिंग

सैंडबॉक्सिंग का मतलब है की आपका एंटी मैलवेयर सॉफ्टवेर नुक्सान पहुंचाने वाली फाइल या प्रोग्राम को एक सिमित एनवायरनमेंट में कैद कर देता है जिससे ये प्रोग्राम आपके कंप्यूटर के बाकी प्रोग्राम या फाइल्स को नुक्सान नहीं पहुंचा पाते |

तो अब जब भी आपको एक अच्छा  एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर लेना हो तो आपको  ध्यान देना चाहिए

की एंटी मैलवेयर में सैंडबॉक्सिंग की फीचर होनी चाहिए

ट्रैफ़िक फ़िल्टरिंग : ट्रैफ़िक फ़िल्टरिंग के साथ, सॉफ़्टवेयर को नुक्सान पहुँचाने वाले सर्वर और मैलवेयर को फैलाने वाले साइटों से  डिवाइस को सिक्योर रक्खे  

  • एक्टिव सिक्यूरिटी : एंटी मैलवेयर सॉफ़्टवेयर को स्पाइवेयर, ट्रोजन और एडवेयर जैसे मैलवेयर के खतरों को स्कैन कर पता लगा सके और जरूरत पड़ने पर हटा भी दे

एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर में क्या अंतर है?

एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर के बीच मुख्य अंतर यह है कि एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर “नार्मल टाइप  के वायरस से ही सिक्यूरिटी देता  है जबकि एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर बार बार अलग अलग तरीके से फैलने और नुक्सान पहुंचाने वाले प्रोग्राम का पता लगा सकता है और उनसे होने वाले खतरों से कंप्यूटर या मोबाइल को सिक्योर रखता हैं|

क्या मुझे एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर दोनों की आवश्यकता है?

इसका जवाब है हाँ। आपके सिस्टम में एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर दोनों सॉफ्टवेयर होने चाहिए। 

केवल एक एंटीवायरस या एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर होने से सिस्टम पर सब कुछ पकड़ने में सक्षम नहीं होगा, “यही कारण है कि सिक्यूरिटी एक्सपर्ट  एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर दोनों  को रखने की सलाह देते  हैं “

एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर एक-दूसरे के साथ अच्छे से काम करते हैं अगर system में दोनों सॉफ्टवेर हैं तो आपका मोबाइल या कंप्यूटर  ऑफलाइन और ऑनलाइन खतरों से बचे रहता हैं

लेकिन आजकल  नए नए वायरस  ये मैलवेयर आते रहते हैं , इसलिए  ये भी ध्यान देना जरूरी हैं की अगर आपके सिस्टम पर एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर साथ भी हैं तब भी आप 100% सुरक्षित रहेंगे ये जरूरी नहीं। 

तो आज आपने वायरस , मैलवेयर , एंटीवायरस , एंटी मैलवेयर , दोनों के बीच अंतर और दोनों को एक system में इंस्टाल करने पर होने वाले फायदों के बारे में जाना | अगर आप साइबर सिक्यूरिटी में इंटरेस्ट रखते हैं तो साइबर सिक्यूरिटी से जुडी नयी नयी जानकारी के लिए mycslab की वेबसाइट और youtube को सब्सक्राइब और फॉलो करना न भूलें mycslab आपको इन्स्ताग्राम ऑफ़ फेसबुक पर भी आसानी से मिल जाएगा |

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